तेहरान: मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात अब और गंभीर होते दिख रहे हैं। हाल ही में शिराज के पास ईरान ने एक चीन निर्मित विंग लूंग II (Wing Loong II) ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। यह ड्रोन आमतौर पर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, न कि अमेरिका द्वारा। अगर ड्रोन को मार गिराने का दावा सही साबित होता है, तो इसका मतलब होगा कि किसी खाड़ी देश का ड्रोन ईरान के ऊपर उड़ान भर रहा था। ऐसे में ड्रोन के हमलावर देश का पता चलने पर ईरान बड़ा पलटवार कर सकता है।
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सऊदी से ड्रोन का कनेक्शन निकला तो होगी मुश्किल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान सऊदी अरब को उठाना पड़ सकता है। सऊदी की सबसे बड़ी चिंता उसके तेल और ऊर्जा ठिकानों को लेकर है। हाल ही में ईरान ने सऊदी के महत्वपूर्ण तेल ठिकानों को संभावित हमलों की सूची में शामिल किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि जब तक सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद रहेंगे, तब तक वह निशाने पर रहेगा। वहीं, अगर कहीं से भी चीन निर्मित विंग लूंग II का कनेक्शन सऊदी से निकलता है तो उसे मुश्किल हो सकती है।
ईरान से सीधे टकराने से बचना चाहता है सऊदी
डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बदलाव ने सऊदी अरब की चिंता और बढ़ा दी है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की सख्त भूमिका अचानक नरम पड़ने से सऊदी को लग रहा है कि उसे अब खुद अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी ज्यादा उठानी पड़ सकती है। सऊदी अरब को पहले उम्मीद थी कि इस संघर्ष से ईरान की ताकत कमजोर होगी या वहां राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी, लेकिन अब हालात उलटे पड़ते दिख रहे हैं। अगर ईरान कमजोर नहीं होता, तो सऊदी के लिए उससे टकराव और महंगा साबित हो सकता है।
सऊदी के लिए 2 मोर्चों पर बढ़ सकता है खतरा
स्थिति को और जटिल बनाते हुए, ईरान ने हूती विद्रोही को भी सक्रिय कर दिया है। ये विद्रोही पहले से ही सऊदी अरब के कट्टर विरोधी माने जाते हैं और यमन से कई बार सऊदी पर हमले कर चुके हैं। ऐसे में सऊदी को डर है कि अगर हूती हमले तेज करते हैं, तो उसके लिए दो मोर्चों पर खतरा बढ़ जाएगा। कुल मिलाकर, अगर ड्रोन का सऊदी या यूएई से किसी भी तरह का रिश्ता निकलता है तो खाड़ी क्षेत्र में आने वाले दिनों में टकराव और बढ़ा हुआ देखने को मिल सकता है।